बोमा पद्धति से पकड़े जाएंगे नीलगाय और कृष्णमृग, वन विभाग ने शुरू की तैयारी 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक ब्रजराजखेड़ी में लगाया जाएगा विशेष बोमा डोम….किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों को बोमा पद्धति से पकड़ने की तैयारी…वन्यजीवों के झुंड की लोकेशन व्हाट्सऐप पर देने का आग्रह…

उज्जैन। खेतों में नीलगाय और कृष्णमृग की बढ़ती आवाजाही तथा उनके झुंड को पकड़ने के लिए वन विभाग ने विशेष अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत दक्षिण अफ्रीकी बोमा पद्धति का इस्तेमाल किया जाएगा। अभियान के लिए 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक ब्रजराजखेड़ी में विशेष बोमा डोम लगाया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर वन विभाग की टीम ने आसपास के कई गांवों का निरीक्षण कर प्रस्तावित स्थल और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। नीलगायों के कारण किसान लंबे समय से परेशान हैं नीलगायों के झुंड के झुंड किसानों के खेतों में पहुंचकर उनकी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं लेकिन अब बोमा पद्धति से नीलगायों को पकड़ा जाएगा। जिससे किसानों की फसलों को नुकसान नहीं होगा और किसानों को इस समस्या से निजात मिलेगी।
डीएफओ अनुराग तिवारी के नेतृत्व में वन विभाग और जनपद उज्जैन की संयुक्त टीम ने ब्रजराजखेड़ी, हासमपुरा, सेवरखेड़ी, आलमपुर और पंथपिपलाई क्षेत्र का भ्रमण किया। टीम ने उन स्थानों का निरीक्षण किया, जहां नीलगाय और कृष्णमृग के झुंड दिखाई देते हैं।
खेतों में पानी नहीं देने की अपील
डीएफओ अनुराग तिवारी ने ग्रामीणों से अभियान में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान कुछ दिनों तक खेतों में पानी नहीं दें, ताकि नीलगाय को पकड़ने की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए। इसके साथ ही ग्रामीणों से कहा गया है कि यदि कहीं नीलगाय या कृष्णमृग के झुंड दिखाई दें तो उनकी लोकेशन वन विभाग को व्हाट्सऐप नंबर 95750 02163 पर भेजें। इससे वन विभाग की टीम को वन्यजीवों की स्थिति और उनके विचरण वाले क्षेत्रों की जानकारी मिल सकेगी।
छह विभागों के समन्वय से चलेगा अभियान
नीलगाय और कृष्णमृग को पकड़ने का यह अभियान वन विभाग के साथ जनपद उज्जैन, पुलिस, राजस्व, पशुपालन और विद्युत विभाग के आपसी समन्वय से संचालित किया जाएगा। वन विभाग का प्रयास है कि ग्रामीणों के सहयोग और सभी विभागों की संयुक्त व्यवस्था से अभियान को सुचारु रूप से पूरा किया जा सके।
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